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Corona Ne Hume Sikhaya Hai

माना कि कोरोना ने हमें बहुत सताया है, लेकिन हमें बहुत कुछ सिख लाया है
भूल गए थे हम अपनी संस्कृति,
सीख गए थे हाथ मिलाना गले लगाना, वापस हाथ जोड़ अभिवादन करना सिखलाया है।
मंगल, चांद को छू आए हम लेकिन एक छोटे से वायरस का इलाज नहीं ढूंढ पाए यह बतलाया है।
बड़ी हस्ती हो या मेहनत कश, सभी इंसान है यह बतलाया है।
कितना भी अभिमान करें ,मगर वक्त के आगे बेबस है यह बतलाया है
पैसों की आपाधापी में भूल गए हम अपनों के साथ समय बिताना,
घर में रहकर अपनों के साथ समय बिताना सिखलाया है..

मेरे प्यारे पापा

पापा की परी हूं मैं
मेरे पापा ने मुझे उंगली पकड़कर चलना सिखाया
पापा कहते थे
मेरी आस हो तुम, मेरा विश्वास हो तुम, मेरा गुमान हो तुम
पापा कहते थे आसमान छूने की चाहत रखो तभी तो आसमान छू पाओगे तुम
उन्होंने मुझे पढ़ाया आगे बढ़ने के लिए उत्साहित किया और आप निर्भर बनाया
उन्होंने मुझे अच्छे संस्कार दिए जिससे मैं दोनों कुलों को रोशन कर सकूं
पापा कहते थे तुम मेरी बहादुर बेटी हो
यह कहकर उन्होंने मेरे आत्मविश्वास बढ़ाया
मेरे पापा मेरे आदर्श हैं

Mayke Ki Yaad

तुम भी अपना ख्याल रखना, मैं भी मुस्कुराऊंगी,
इस बार जून में मैं मायके नहीं आ पाऊँगी।

बचपन की वो सारी यादें, दिल में मेरे समायी हैं।
बड़े लाड से पाला,कह के कि तू पराई है।
संस्कार मुझ को दिए वो सारे,हर दर्द सिखाया सहना।
जिसके आंचल में बड़े हुएआ गया उसके बिन रहना।
इंतजार में बीत जाते हैं,यूं ही महीने ग्यारह।
जून के महीने में जा के,देखती हूं चेहरा तुम्हारा।
कितने भी पकवान बना लूं,कुछ भी नहीं अब भाता है।
तेरे हाथ का बना खाना,मां बहुत याद आता है।
शरीर जरूर बूढ़ा होता है,पर मां-बाप नहीं होते हैं।
जब बिटिया ससुराल से आती है,तो खुशी के आंसू रोते हैं।
तेरे साये में आ के मां मुझ को मिलती है जन्नत।
खुद मशीन सी चलती हो, मुझ को देती है राहत।
मां कहती है- क्या बनाऊं, बता तुझे क्या खाना है?
पापा कहते – बाहर से क्या लाना है?
जो ग्यारह महीने भाग-दौड़ कर हर फर्ज अपना निभाती है,
जून का महीना आते ही फिर बच्ची बन जाती है।
ग्यारह महीने ख्वाहिशें मन के गर्भ में रहती हैं,तेरे पास आते ही मां जन्म सभी ले लेती हैं.

देश पे है विपदा आयीमैं भी फर्ज निभाऊंगी
इस बार जून के महीने में मैं मायके नहीं आ पाऊंगी।

तुम भी अपना ख्याल रखना, मैं भी मुस्कुराऊंगी,
इस बार जून के महीने में मां, मैं मायके नहीं आ पाऊंगी।